समय की कश्ती

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समय  की कश्ती, पे हम तो बेखबर सवार है
डूब के जाना है या तैर के, ये भी एक बड़ा सवाल है
समय तो अपनी गति से चलता ही जायेगा
गया वक़्त अब वापिस फिरसे कहाँ आयेगा
इसलिए करो तुम अपने वक़्त की कदर
कही ऐसा ना हो, मिले तुम्हे जल्द ही कोई बुरी खबर .
समय  की कश्ती पर नजाने कितने मुसाफिर सवार है
मंज़िल मिलेगी या नही, ऐसे ढेरो उनके मनमे सवाल है
पर कश्ती वाला तो कश्ती चलाता ही जायेगा
सबकी मंज़िल का आभास, सबको वो कबतक करायेगा
इसलिए जानो, तुम्हे कहाँ जाना है
क्यूंकि  वक़्त रहते हमे अपने शिखर पर पहुँच जाना है।

Prerna Mehrotra
Mumbai Local
13/7/2014

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