बेमतलब

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बेमतलब के लोग तो बेमतलब की बात ही करेंगे 
उनके कर्म भी उनसे अब  कबतक डरेंगे 
वक़्त दिखायेगा उनको अब उनकी छवि 
निकलेगा जब नया रवि.
 
बेमतलब की सोच तो तुम्हे बेमतलब राह  तक ही पहुचायेगी 
वहा पहुंच कर तुम्हे मेरी ये कविता याद आएगी 
फिर भी अगर तुमने खुदको नहीं बदला 
मार गिरायेगा तीर तुम्हे अगला। 
 
बेमतलब की बातें तो तुम्हे बेमतलब लोगो सेही  मिलवायेंगी 
फिर कहाँ तुम्हारी मेहनत तुम्हारी किस्मत को  चमकाएगी 
फिर भी, तुमने बेमतलब बात करनी ना छोड़ी 
चीरती हुई जाएगी तुम्हारे सीने में फिर, वो तुम्हारे कर्मो की गोली। 
 
Prerna Mehrotra
27/7/2014
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