लहर का कहर

karachitsunmai

एक खूबसूरत लहर
जब मचाये कहर
खाजाये सबको वो फिर बनके ज़हर
रोकने पर भी जो ना ठहरे
दिखाए हर रूप के वो अपने चहरे
चड़े उसे जब बदलेका जोश
अच्छे अच्छो को करदे वो बेहोश
वरना तो करे अपने दायरे में
वो सबको मदहोश।
उसका पानी तो वैसे एक सदाहरण सा जल हैं।
पर तभाई करने पे जो आये
तो उसमें हज़ार हाथियों का बल है।
उससे टकराने का देती हमे वो फल
जिससे बचनेका हमारे पास ना हैं कोई हल.

Prerna Mehrotra
21/10/2014

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