हाथों की लकीरों में

DSC04627

Source:http://2.bp.blogspot.com/_3azWz0gNd3I/TLGwZEDrnxI/AAAAAAAAA2s/b-pKSKAH-9k/s1600/DSC04627.JPG

हाथों की लकीरों में
अगर भाग्य होता।
एक अपंग तो पैदा होते हीं
फिर मौत की नींद सोता।

हाथों की लकीरों में
अगर ज़रा भी ज़ोर होता
खाली बैठ हर जवान फिर
चैन से सोता।

हाथों की लकीरों में
किसी का कल बया नहीं होता।
गलत कामो की आदत से हीं
इंसान मन चाही वस्तु खोता।

हाथों की लकीरों में
तू क्यों खोजाता हैं
बिना कुछ करे हीं बड़े
ख्वाब क्यों सजाता हैं?
ये लकीरें तेरी मेहनत से चमकती हैं।
तेरे संघर्ष की ऊर्जा फिर हर
दिशाओं में दमकती हैं।

Don’t blindly trust on luck it is something but not everything until or unless you do something to meet it.

Prerna Mehrotra
15/11/2014

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