ऐसा क्यों ?

मात पिता ने जन्मा
उनके स्नेह से निकला हर एक लम्हा
उस लम्हे के उपरांत
उन्से मैंने बहुत कुछ पाया।
उनसे दूर रहकर
बैठा अकेला मेरे साथ मेरा साया।
आज क्यों मुझे इतना रोना आया
क्यों दुखों का पल,मुझे फिर से उसी मोड़ पे लाया।
जिससे बहार निकलना तो मैं  चाहता हूँ,
पर हार कर अंत में मैं अश्क ही बहाता हूँ,
क्यों इस परीक्षा का अंत मुझे नज़र नहीं आता?
क्यों इसके रहते मेरा मन इतना खबराता?
क्यों मेहनत कर भी मैं सफल नही हो पाता????

Prerna Mehrotra
23/12/2014

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