ख्याल आया

buddha_painting_in_psp_cs5_by_muralikrish-d55bpjy

Image Source-http://orig12.deviantart.net/45d7/f/2012/180/3/e/buddha_painting_in_psp_cs5_by_muralikrish-d55bpjy.jpg

मुसीबत आई, तो ख्याल आया
संग था, हर पल, बस मेरा खुद का साया ।
अंधेरे में हुआ जब वो भी दूर,
तब दिखा मुझमें उसका नूर।
अब क्यों दुखो पर आँसू  बहाऊ?
उसे पाकर अब क्यों ना मैं उसकी होजाऊ ??

बहार आई तो ख्याल आया,
संग था उसके बस उम्मीद का साया,
इंतज़ार कर भी, जब ना हुई वर्षा!
बावरा मन फिर भी ,एक बूँद को तरसा।
नियमित वक़्त पर ही, तो बहार आती है,
उसके इंज़ार में ये सृष्टि फिर क्यों सूख जाती है??
आता है दुख,तो सुख की सूचना लेकर।
पर क्या मिला सृष्टि  को इतना बलिदान देकर??
निस्वार्थ पालन किया जिसने हमारा??
उसे सता कर, क्या अब भी पेट नही भरा तुम्हारा????

जब गया दूर कोई अपना, तो ख्याल आया
गुज़रे लम्हों का रह जाता है बस साया।
इस हकीकत से क्यों बनते हो अनजान?
मृत्यु  ही तो है इस शरीर का अंजाम।
प्रत्येक  दिन को ख़ुशी से गुज़ारो ,
कह गए है ऐसा, लोग हज़ारो,
हर दिन उनके ज्ञान को पढ़ अपना जीवन सवारों।

Prerna Mehrotra
30/11/2015

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