वीचारना

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किसी को बनाने में अपना,
ना हैं कोई बुराई।
किसी ने मारी ठोकर,
तो किसी ने तुम्हारी दुनियाँ सजाई।

हौसलों में छुपा तूफान
किसी को दिखता नहीं।
मुफ्त में भी तो आज
ज्ञान बिक्ता नही।

आँखों में सजाके,
सपने गहरे कोई रोता हैं।
उन आँखों को कर नज़र अंदाज़,
कोई चैन से सोता हैं।

 

Prerna Mehrotra
16/3/2017

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2 thoughts on “वीचारना

  1. Arjun Naik (Asst Professor - ITM Khr) says:

    Hi Prerna.

    Very well expressed in few words.

    Your lines are touching the heart.

    Keep writing.

    Best wishes.

    2017-03-16 22:57 GMT+05:30 Prerna Mehrotra’s Weblog :

    > prerna858 posted: ” किसी को बनाने में अपना, ना हैं कोई बुराई। किसी ने मारी
    > ठोकर, तो किसी ने तुम्हारी दुनियाँ सजाई। हौसलों में छुपा तूफान किसी को दिखता
    > नहीं। मुफ्त में भी तो आज ज्ञान बिक्ता नही। आँखों में सजाके, सपने गहरे कोई
    > रोता हैं। उन आँखों को कर नज़र अंदाज़, कोई चैन से”
    >

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