उमड़ते जज़्बात

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A journey of my thoughts…..

इन उमड़ती भावनाओं की कहानी,
आज मैं सबको बताती हूँ.
हर रोज़ चुप रहकर भी,
हाले दिल मैं अपना, सबको सुनाती हूँ.
खाली जो बैठूं ज़रा,तो ये दिल मचलता है
करवाकर रचना मुझसे,
फिर जाकर, ये कही संभलता है.
कई अनोखी कहानियाँ, इस मन में दबाके रखती हूँ.
चाहु तो ना लिखू,
मैं ऐसा भी तो कर सकती हूँ ??
करा जब ऐसा!!!
खुदको ही बोला,ये जीवन तेरा हैं कैसा??
ये अलास तुझे कही का नहीं छोड़ेगा।
बिठा कर यू ऐसे, ये अंदर से तुझे तोड़ेगा।
ऐसेही नहीं मैंने, इन रचनाओं की,इमारत बनाई हैं.
इसे बनाने में मैंने खुद की ही,डाट लगाई हैं.
करके डंडा खुदपर,मैं हर रोज़ लिखती हूँ.
अपने ही अंदर बैठे गुरु की डाट की अग्नि में,
मैं हर रोज़ सिकती हूँ.

 

Prerna Mehrotra Gupta
3/5/2017

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