किसी को जब फर्क न पड़े

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If people are not understanding your situation then try to make them realize their mistake through your love & compassion but also try to maintain your self-respect.

किसी को जब फर्क न पड़े,तुम्हारे रूठने से।
रिश्ता बिखर कर नहीं जुड़ता,
एक बार गलत तरीके से उसके टूटने से।
तो क्यों न वक़्त -वक़्त पर, अपनी-अपनी बात रखी जाये।
क्यों न दोनों मिल कर, अपना रिश्ता सजाये।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे न होने से,
चैन मिलेगा क्या तुम्हें, अकेले में कही रोने से,
अगर मिले, तो ज़रूर कही चुप के से रो लेना।
अपनों से नाता तोड़, बस अपनों से रुख न मोड़ लेना।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे दुख से,
एहसास कराओ उसको अपनी पीड़ा,अपने प्यार भरे सुख से,
तुम्हारा सच्चा प्यार ही उसको उसकी गलती का एहसास करायेगा।
तुम्हें मनाने एक दिन वो भी ज़रूर प्यार से आयेगा।

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/6/2017

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