होसकें तो

होसकें तो सबके दिल में,
उम्मीदों के दिए जलाना।
अहम कर खुद पर,
बस अपनी ही ना चलाना।

होसके तो सबकी,
उम्मीदों पर उतरना।
नाकाम हुए जो इरादे,
फिर भी तुम ना बिखरना।

होसके तो सबसे,
उम्मीद ना लगाना।
खुद पर कर विश्वास,
अपनी ज़िन्दगी को रंगों से सजाना।

 

Prerna Mehrotra
13/9/2016

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किसी दिन……

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किसी दिन तो मुझे भी,
कोई प्यार से बुलायेगा।
दिल में भर, अपार चाहत,
कोई मेरी ही रचनाओं के गीत गुन गुनायेगा।
किसी दिन तो मेरी भी,
इन रचनाओं का घड़ा भर जायेगा।
डूबेंगे सब, इन रचनाओ के सागर में,
पर मन कहाँ किसी का भर पायेगा।
किसी दिन तो मैं भी,
इतिहास के इन पन्नो(panno) को पलट कर रोऊँगी।
करूँगी ऐसी ही दिन रात मैं  रचनाये,
फिर  जाके जीवन के अंतिम पल में ,
मैं कही चैन से सोऊँगी।
Prerna Mehrotra

कोई तो

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कोई तो रह गया पीछे,
कोई तो आज भी मेरे साथ है,
बढ़ती उम्र के दौर में,
मुझे बदलने में, उसका ही तो हाथ हैं।
बचपन में था वो मेरे संग,
आज जवानी में भी साथ हैं,
कौन है वो आखिर,
जिसका मुझमे ही कही वास है.
दिखता तो नहीं कभी,
फिर भी क्यों उससे मिलनेकी मुझे आस है।
सुना है उसके बारे में,
महसूस उसे मैं हर पल करती हूँ,
ऐसे मंगल भाव की कामना,
अब मैं क्यों हर एक के लिए करती हूँ??

 
Prerna Mehrotra
13/7/2016

हाँ मैंने देखा हैं

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रामायण का करते बखान,
ऐसे भाइयों को लड़ते हुए मैंने देखा है।

माता के बनते हैं पुजारी,
पर बेटियों को बनते हुए बोझ मैंने देखा हैं।

भक्ति का करते है ढोंग,
मैंने धर्म के नाम पर करी लड़ाइयों को देखा हैं।

सुना था हम सब एक है,
पर अपनी बिरादरी को ऊचा बताते हुए लोगो को मैंने देखा है।

बहू को कहते हैं बेटी,
फिर भी हर बहू को घुटते हुए मैंने देखा हैं।

हवन में डालते है आहूति,
घर पर माँ-बहन की गली देते लोगो को मैंने देखा हैं।

ब्राह्मण को कराते हैं भोजन,
भूखे बच्चों पर चिलाते हुए लोगो को मैंने देखा है।

हाँ मैंने देखा हैं
हाँ मैंने देखा हैं।

 

Prerna Mehrotra
1/6/2016

हमेशा

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हमेशा ये दिमाग- दिल की सुन नही पाता,
इसलिए खाली बैठ ख्वाहिशों के तार ये बुनता ही जाता।

हमेशा हार की वज़ह “प्रयास की कमी “नही होती,
क्यूंकि प्रयास की हार में, हार कर भी जीत ही होती।

हमेशा अच्छा सोच पाना जब मेरे बस में नही होता,
अपने ही अंदर की बुराई को देख, ये मन बहुत है रोता।

हमेशा कर भला जब अच्छा मिलता नहीं,
भूल कर दुनियाँ के ताने, सोचू जो लगता बस इस मन को सही।

 

Prerna Mehrotra
31/5/2016

आज़ाद हूँ मैं

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Humanity never talk about discrimination don’t know much about religion.

आज़ाद हूँ मैं, मुझे आज़ाद ही रहने दो,
सूनी हैं सबकी, आज कुछ मुझें भी कहने दो,
अज्ञानी नही मैं अब , जो ज्ञान को समझ नही सक्ति
महीने के हर दिन होती हैं मेरी श्रद्धा में भक्ति।
तिरस्कार कर मेरा क्यों मुझे अछूत तूने हैं माना?
ज्ञान के समुन्दर में तैर, मैंने सच को अब हैं पहचाना।
भेद- भाव चाहे छोटे- बड़े में हो
अमीर या गरीब में हो
लड़का -लड़की में हो
जाती- धर्म में हो
ये सब अज्ञानंता की निशानी हैं।

 

Prerna Mehrotra
29/4/2016

Dr B.R Ambedkar

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भारत के संविधान की करी जिसने रचना,
ऐसे वीरो की सोच से हर बुराई को हैं बचना।
जो आयेगा आड़े वो टिक नहीं पायेगा,
बुराई की राह पर खुद चलके, तू दूसरों को क्या सिखाएगा??

बताया सबने,पर उसने दिखाया करके
बड़ चला वो आगे फिर सब जाति को एक करके।

ना मोह का बंधन, ना थी जिसमें लालच की आग,
निडर होकर लिया उसने हर परिस्थिति में भाग.

जो बरसे अंगारे या बरसीं शब्दों की मार,
चुप ना बैठा वो कभी, मान के अपनी हार।

ऐसे साहेब युगों युगों में एक ही आते हैं,
प्रदर्शन कर अपने गुणों का,वो कुछ नया रच के जाते हैं।

मेरी तुम्हारी कुछ नहीं, उसने करा हमारा
कुछ ना लिया तुमसे, फिर भी कर दिया सब कुछ तुम्हारा।

जाती धर्म की लड़ाई में,जो अकेला लड़ा बेचारा,
कटु शब्दों के बाणों ने, उसे घायल कर-कर  मारा।
सहता वो कब तक सबकी?
जो  लगी हवाओं में भेदभाव की झपकी।
ओडी  उसने फिर बौद्ध  धर्म की चादर,
सिखाया दुनियाँ को फिर प्यार से आदर.
भेद भाव कर आपस में कोई बड़ा कुछ नहीं पाता हैं,
नफ़रत की आग का ज्वाला, सच्चे धर्म के बीज को जलाता हैं।

Prerna Mehrotra
16/4/2016