ख्यालों की दुनियाँ

As you think so you become so be positive always.

ख्याल क्या हकीकत बन कर,
हमारे सामने आते है?
क्यों ख्यालों की दुनियाँ में,
हम अक्सर चोट खाते है??
ख्यालों की दुनियाँ में,
ये कैसी लड़ाई हमारे अंदर ही कही चलती है।
कुछ पाने की आरज़ू की लॉ,
हमारे अंदर ही कही जलती है।
ये हकीकत है, या बस किताबों में लिखी बातें है।
इस सच की खोज में,
काटी हमने न जाने कितनी रातें हैं।
अभी तक के ख्याल तो मेरे सामने,
वही रूप लेके आये है।
फिर क्यों हम खुद को अभी तक समझ नहीं पाये है।
मेरे हर ख्याल को बस वही रूप लेने की देरी हैं।
जीवन के आने वाले हर पड़ाव में,
लिखी, “जीत “सिर्फ मेरी हैं।
ये ख्याल बहुतो को राह दिखायेंगे,
आने वाले इतिहास के पन्नो में,
शायद हम भी जग मगायेंगे।

Prerna Mehrotra Gupta
22/6/2017

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तुम्हारा जीवन तुम्हारे हाथ में ही है।

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जीना तो तुमनें सीखा ही नहीं
रह गए इसलिए,आज भी तुम वहीं
निकल ना जाये ये वक़्त भी कहीं
चुनलो अब तो राह तुम सही।

हारना तो तुमनें सीखा ही नहीं
जीत गए,छल कर, हर बार तुम यही
निकल गए तुम्हारे साथी,
सच्ची राह में दूर कहीं
अंत में फिर, तुमने ही ये कहां क्यों,
तुम्हारे साथ ये सही हुआ नहीं??

सहना तो तुमनें सीखा ही नहीं
कहने को ना चूके किसको
तुम कुछ भी कही।
ज़िंदगी लेकर आई हैं, देखो
तुम्हे फिरसे वहीं।
अब तो पूरी दुनियां भी कहती
है -तुमने कभी ना करा
कोई भी काम सहीं।

देना तो तुम नें सीखा ही नहीं
लेते गये सबका तुम कुछ भी कहीं।
अब रहगए है तुम्हारे पास
कुछ समान वहीं।
जिसे जोड़ने से पहले
तुमने एक बार ना सोचा
क्या गलत था और क्या सहीं।

Prerna Mehrotra
2/10/2014