चित्र की कहानी मेरी ज़ुबानी

unnamed

yesterday I went to my relative place there I saw this painting its appears to me as if peahens trying to console peakcock and making him realize the importance of her in his life.

यू मुख मोड़,
क्यों बात तुम नही मुझसे करते हो.
खड़ी हूँ जब मैं तुम्हारे सामने,
फिर क्यों इस दुनियां से डरते हो??
अकेली मैं ही सब पर भारी पड़ जाऊँगी।
अपनी संगति में तुझको रखकर,
मैं तुझे भी काबिल बनाऊँगी।
मेरी इन भावनाओं का रंग देख कितना गहरा हैं।
किसी को देख कर भी अब ना देखू,
क्यूंकि दिल में तो बस तुम्हारा ही चेहरा हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
27/5/2017

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