मेरी कुछ अन कही ख्वाहिशें

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My untold dreams…..

काश एक शांति की दुनियाँ मैं बना पाऊँ,
काश उसे अपनी अच्छी सोच से मैं सजा पाऊँ,
आसान  हैं लड़ झगड़ के रहना,
बड़ा मुश्किल हैं, शांति से हर बात को अपनी कहना।

काश मेरी ख्वाहिशों के इशारे,
मेरे अपनों को समझ आने लगे।
कैसे दुनियाँ को भूल हम,
खुदा की बनाई राह पर जाने लगे।

काश ज़िन्दगी का सफर,
यूं  ही अपनों के संग हस्ते हुये कट जाये।
मेरी कमाई ज्ञान की दौलत,
मेरे अपनों में थोड़ी थोड़ी बंट  जाये।

काश मेरे हर दिन के परिवर्तन को लोग जान पायें,
मुझे समझ, मेरे पीछे कोई, मुझसे ये पूछने को आये,
तुम्हारे व्यवहार में ऐसी निर्मलता कैसे आई।
तुम्हारे हर रूप की छवि हम सब के मन को है भाई।

काश इस दुनियाँ में,
सब प्यार की भाषा समझते,
अपने को संभाल,
किसी और की बातों में ना उलझते।

काश प्यार की अनोखी कला,
मैं दुनियाँ को शांति से बताती।
अपने को कर जग कल्याण के लिए समर्पित,
मैं दूसरों की ख़ुशी में मुस्कुराती।

काश शांति का सफर,
सबको अच्छा लगता करना।
मद मस्त रहते सब अपनी धुन में,
फिर काहे, किसी से डरना।

Prerna Mehrotra Gupta
7/6/2017

 

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गाँव की रंगीन दुनियाँ ???

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A Salute to a farmers & their family……

ऐसी प्रकृति की ताज़गी,
अब शहरों में खोगई।
देख इन हसींन वादियों को,
ये कवियत्री  भी ख़ुशी से रो गई।
जहाँ देखू वहाँ बीते कल की दास्ताँ,
सुनाई पड़ती हैं।
सुन उन यादों की कहानी,
ये कवियत्री आगे बढ़ती हैं।
कही मटका दिखा,
तो दिखीं, कही खेतों में हरियाली ।
सुख कर काटा बन चुका था,
वो खेतों का माली।
आसान नहीं ये जीवन,
बस दूर से ऐसा लगता हैं।
कर इतनी मेहनत,
किसान को क्या मिलता हैं???

 

Prerna Mehrotra Gupta
28/5/2017

पृथ्वी की हर एक चीज़ को मैंने अपना माना

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A fight between air & the fragrance of soil. They both need my attention when rain happen.
खुदसे सोचा खुदसे जाना,
पृथ्वी की हर एक चीज़ को मैंने अपना माना।
ठंडी हवा का झोका,
जब कुछ मुझसे कहकर जाता हैं।
मिट्टी की सौंधी खुशबू का मन,
ये देख,भर आता हैं।
कैसे हवाये मुझे खुदमे उलझा देती हैं।
मिट्टी की वो खुशबू ना जाने क्यों ??
उसी वक़्त अंगड़ाई लेती हैं।
उस खुशबू को कर महसूस,
फिर उसे मनाना पड़ता हैं।
उसके प्रति मेरे प्यार को देख,
फिर हवाओं का पारा चढ़ता हैं।
दोनों को कर एक,
फिर उनके रस में डूब जाती हूँ।
अपनी भावनाओं के ज़रिये,
मैं ऐसे प्रकृति को मनाती  हूँ।
Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

बधाई हो

Wishing you a very happy 51st wedding Anniversary….

तमन्ना है, हर जन्म के जीवन का,
हर पड़ाव आप साथ में बिताये।
अपनों के संग रहकर,
यूही हमेशा प्यार लुटाये।
अपनों से जुड़ा ये गठ बंधन
आपका जन्मों जन्मांतर तक जायें।
देख इस प्यारीसी जोड़ी को,
ब्रहमा विष्णु भी मुस्कुराये।

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

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अपने मात पिता का आंगन छोड़,
जब मैं इस अंगना में आई।
उनकी वो छवि मैंने अपने,
सास ससुर में पाई।
उनके प्यार की छवि,
इस बहू को इस कदर भायी।
अपने पीहर की यादों के संग,
मैंने यहाँ भी अपनी कई यादें बनाई।
विचारों में भिन्नता होते हुए भी,
मैं इनपे जान लुटाती हूँ।
सबको एक सूत्र में बांध रखने का,
विश्वास मन में जगाती हूँ।

Rakhi Garg

निस्वार्थ प्यार बहन का…..

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P.C- Prateek Saini

My Feelings towards my elder sister ” Priyanka”.

बिन बताये मुझे,
तूने मेरे हक़ में, आवाज़ उठाई ।
चाहती तो चुप रहती,
क्यों करती है मेरे लिए,
तू इस दुनियाँ से हमेशा लड़ाई ??
तेरा ये निस्वार्थ प्यार,
मुझे बचपन से भाता है।
होके दूर तुझसे,
ये मन मेरा, घबराता है।
जीवन के कई कठिन पड़ाव में,
तूने हमेशा चार चाँद लगाये है।
ये समय का घोड़ा,
देख बहन  कैसे हमे भगाये हैं.
कल तक जब मैं, तेरे संग रहती थी।
भले ही रूठ जाती, इस दुनियाँ से,
बस तेरे से सब कुछ, मैं कहती थी।
उन यादों की परछाई,
मुझे आज भी हँसा देती हैं।
मेरी अपनी सोच, ये मुझसे, कैसा बदला लेती है ??
कैसे सोचा मैंने, कि शायद तूने मुझे भुला दिया??
इस सोच की खातिर,
मैंने ना जाने,कितनी बार खुदको रुला दिया।
तेरे इस निस्वार्थ प्यार को, आज मैं पहचान गई.
तुझ बिन रह नहीं सकती, आज मैं भी ये मान गई।
अपनों को लेकर संग,
हम यू ही मिलकर रहेंगे।
अपना हाले दिल, यूही हमेशा हम एक दूसरे से कहेंगे।

 

Prerna Mehrotra
14/5/2017

दास्ताँ शहीद की……

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Image Source-http://news24online.com/jai-hind-help-martyrs-kins-via-websitegovt-salutes-akshays-idea-76/

कैसे ज़िन्दगी के सीने पे,रख कर,
तुम अपना सर,अपनी जान गवाते हो??
खुद की दुनियाँ को भूल,
क्यों आजीवन, दूसरों की दुनियाँ सजाते हो??
तुम्हरी पत्नी भी तो,
तुम्हारे इंतज़ार में रोती हैं।
अचानक तुम्हारे शव को देख,
वो अपनी सुध-बुध खो देती हैं।
तुम्हारा आशियाना तुम्हारे इंतज़ार में,
कई ख्वाब सजाता हैं।
तुम्हें सदा के लिए खोकर,
वो भी रुआँसा हो जाता हैं।
कैसे अपनी यादें छोड़,
तुम कही, इस दुनियाँ में खो जाते हो??
अपनो को देख यू रोता,
क्या तुम भी रो जाते हो??
हैं अगर ये सच,
तो आजाओ फिर एक बार सामने।
दुनियाँ की इस भीड़ में,
एक बार फिरसे हमारा हाथ थाम ने।
तुम्हारी यादो की छवि हम से,
अक्सर ये कह जाति है.
भूली नही मैं तुझे,
फिर क्यों इन यादों को सोच,
तू अक्सर अश्क बहाती हैं??
मिलकर बिछड़ना यही
तो ज़िन्दगी का नाम हैं।
मर मिटते है देश के खातिर,
ये सब तो हमारे लिए आम है।
मरके भी देखो यारो,
हमारे हाथो में जीत का जाम हैं।
यू दुखी होकर,
तुम खुदको कभी सताना नहीं।
बस यादों में खोकर,
हर पल यू प्यार जताना नहीं।
मिलेंगे फिर से हम कही इस जहान में।
ना होगी तुम्हें ज़रा भी देरी,मेरी पहचान में।
दुनिया की भीड़ में भी,
मैं तुम तक पहुँच जाऊँगा।
रहूँगा सदा तुम्हारे साथ,
अब तुम को ऐसे कभी ना रुलाऊँगा।

 
Prerna Mehrotra Gupta
29/4/2017

कोई तो

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कोई तो रह गया पीछे,
कोई तो आज भी मेरे साथ है,
बढ़ती उम्र के दौर में,
मुझे बदलने में, उसका ही तो हाथ हैं।
बचपन में था वो मेरे संग,
आज जवानी में भी साथ हैं,
कौन है वो आखिर,
जिसका मुझमे ही कही वास है.
दिखता तो नहीं कभी,
फिर भी क्यों उससे मिलनेकी मुझे आस है।
सुना है उसके बारे में,
महसूस उसे मैं हर पल करती हूँ,
ऐसे मंगल भाव की कामना,
अब मैं क्यों हर एक के लिए करती हूँ??

 
Prerna Mehrotra
13/7/2016