किसी को जब फर्क न पड़े

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If people are not understanding your situation then try to make them realize their mistake through your love & compassion but also try to maintain your self respect.

किसी को जब फर्क न पड़े,तुम्हारे रूठने से।
रिश्ता बिखर कर नहीं जुड़ता,एक बार उसके टूटने से।
तो क्यों न वक़्त -वक़्त पर, अपनी-अपनी बात रखी जाये।
क्यों न दोनों मिल कर, अपना रिश्ता सजाये।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे न होने से,
चैन मिलेगा क्या तुम्हें, अकेले में कही रोने से,
अगर मिले, तो ज़रूर कही चुप के से रो लेना।
अपनों से नाता तोड़, बस अपनों से रुख मोड़ न लेना।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे दुख से,
एहसास कराओ उसको अपनी पीड़ा,अपने सुख से,
तुम्हारा सुख ही उसको उसकी गलती का एहसास करायेगा।
तुम्हें मनाने एक दिन वो भी आयेगा।

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/6/2017

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गाँव की रंगीन दुनियाँ ???

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A Salute to a farmers & their family……

ऐसी प्रकृति की ताज़गी,
अब शहरों में खोगई।
देख इन हसींन वादियों को,
ये कवियत्री  भी ख़ुशी से रो गई।
जहाँ देखू वहाँ बीते कल की दास्ताँ,
सुनाई पड़ती हैं।
सुन उन यादों की कहानी,
ये कवियत्री आगे बढ़ती हैं।
कही मटका दिखा,
तो दिखीं, कही खेतों में हरियाली ।
सुख कर काटा बन चुका था,
वो खेतों का माली।
आसान नहीं ये जीवन,
बस दूर से ऐसा लगता हैं।
कर इतनी मेहनत,
किसान को क्या मिलता हैं???

 

Prerna Mehrotra Gupta
28/5/2017

अंदर से संवारो ख़ुदको

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your outer appearance will never define your beauty because it is the heart that is important.The one whose intentions are beautiful is actually beautiful & they are the one who peacefully enjoys their life with dignity and making their environment feel proud.In short, the key to success is to become beautiful from within.” A beautiful heart can earn the trust of millions.

गहरी बन, ज़िन्दगी की गहराई में उतरती हूँ।
अपने को कर बस ठीक,
अब हर रोज़ मैं संवरती हूँ।
इस गहराई का सच,
सच्चे लोग ही समझ पायेंगे।
संवार के यू खुद को आज,
आने वाले कल में वही ज़िन्दगी का लुफ्त उठायेंगे।

 

Prerna Mehrotra Gupta
28/5/2017

पृथ्वी की हर एक चीज़ को मैंने अपना माना

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A fight between air & the fragrance of soil. They both need my attention when rain happen.
खुदसे सोचा खुदसे जाना,
पृथ्वी की हर एक चीज़ को मैंने अपना माना।
ठंडी हवा का झोका,
जब कुछ मुझसे कहकर जाता हैं।
मिट्टी की सौंधी खुशबू का मन,
ये देख,भर आता हैं।
कैसे हवाये मुझे खुदमे उलझा देती हैं।
मिट्टी की वो खुशबू ना जाने क्यों ??
उसी वक़्त अंगड़ाई लेती हैं।
उस खुशबू को कर महसूस,
फिर उसे मनाना पड़ता हैं।
उसके प्रति मेरे प्यार को देख,
फिर हवाओं का पारा चढ़ता हैं।
दोनों को कर एक,
फिर उनके रस में डूब जाती हूँ।
अपनी भावनाओं के ज़रिये,
मैं ऐसे प्रकृति को मनाती  हूँ।
Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

बधाई हो

Wishing you a very happy 51st wedding Anniversary….

तमन्ना है, हर जन्म के जीवन का,
हर पड़ाव आप साथ में बिताये।
अपनों के संग रहकर,
यूही हमेशा प्यार लुटाये।
अपनों से जुड़ा ये गठ बंधन
आपका जन्मों जन्मांतर तक जायें।
देख इस प्यारीसी जोड़ी को,
ब्रहमा विष्णु भी मुस्कुराये।

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

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अपने मात पिता का आंगन छोड़,
जब मैं इस अंगना में आई।
उनकी वो छवि मैंने अपने,
सास ससुर में पाई।
उनके प्यार की छवि,
इस बहू को इस कदर भायी।
अपने पीहर की यादों के संग,
मैंने यहाँ भी अपनी कई यादें बनाई।
विचारों में भिन्नता होते हुए भी,
मैं इनपे जान लुटाती हूँ।
सबको एक सूत्र में बांध रखने का,
विश्वास मन में जगाती हूँ।

Rakhi Garg

ईमानदारी से खेलो

 

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There is no short cut of success.

इस लम्हें को इस लम्हें में,
तू खुल के जीले।
अगर करी हैं तूने ,ईमानदारी से मेहनत,
तो आने वाली जीत का जाम,
तू अभी से पीले।

तेरे कर्म का सच बस तू ही जनता हैं।
अच्छे रास्ते पर चलने वालो को,
ये जग भी मानता हैं।
अपने हित के लिए, किसी का बुरा ना करना।
महंगा पड़ता ,अपना वार ही वरना।

मेहनत से पनपे भोजन का,
स्वाद ही अलग होता हैं।
जो करता है इसमें मिलावट,
आजीवन वो सुख के लिए रोता हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

छोटासा है जीवन

Thought of the day- Create value everyday.

छोटासा है जीवन, क्यों प्रतिशोद की,
आग में तुम आगे बढ़ते हो,
रहजायेंगी यहाँ तो सिर्फ यादें,
हर रोज़ तो तुम यहाँ मरते हो।

 

Prerna Mehrotra Gupta
25/5/2017