अफ़सोस होता है

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Sometimes I feel bad to know the reality can”t we understand or realize this fact that the god resides in each & every creature of this universe then why people fight in the name of religion. No religion taught violence it is only people who lack wisdom. The definition of God is only love.

Prerna Mehrotra Gupta
24/6/2017

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साधू का जीवन

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Spirituality is a continuous process which is based on faith, practice & study. Reading a good book doesn’t make you a better person until or unless you apply the same in your life. This poem of mine will depict the struggle of a genuine practitioner of faith. Anyone can live the life of a monk because it is the heart that is important. Try to be a good person throughout your life.Do not focus outside just focus inside you where good & evil both reside.

ज्ञान के समुंदर में डुबकी लगाके,
जो पानी इस तन पर रह जाता है.
उस गीले पन की आड़ में,
मानव इस दुनियाँ से बहुत कुछ कह जाता है।
सूखे तन पर, ज्ञान का पानी जब मिट जाता है।
एहसास करा कर, उस ज्ञानी को,
साधू से उसे साधारण मनुष्य बनाता है।

ज्ञानी जन को हर रोज़,
ज्ञान के समुंदर में डूबना पड़ता है।
अपने अच्छे कर्म द्वारा ही,
वो इस दुनियाँ से लड़ता है।
अच्छाई का आजीवन साथ
देकर ही वो जीवन में आगे बढ़ता है।

रहता ज्ञान का पानी जब तक उसके तन पर,
पड़ता नहीं गलत का प्रभाव फिर उसके मन पर।
अपनी स्थिति हर रोज़ वो योग से सुधारता है।
अपनी ज्ञान रूपी माला से,
न जाने कितनों का जीवन वो सँवारता है।

 

Prerna Mehrotra Gupta
20/6/2017

खबर नहीं खुदकी

Self control is the best medicine to cure every problem in our life.

खबर नहीं खुदकी,
मगर  दूसरों की खबर तुम रखते हो।
इधर की उधर करना क्या ज़रूरी है?
दूसरे की सुन,उसको सही दिशा भी तो तुम दिखा सकते हो??

खबर नहीं खुदकी,
दूसरों की बातों को सुन,चिढ़ के बैठ जाते हो.
उसके प्रति बैर रखना क्या ज़रूरी है???
उस चिड़चिड़ाहट में तुम अपना ही कीमती वक़्त गवाते हो.

खबर नहीं खुदकी,
दूसरों से उम्मीद लगाते हो.
सबसे अपना काम निकलवाना क्या ज़रूरी हैं??
तुम अपनी क्षमता को क्यों नहीं जगाते हो.

खबर नहीं खुदकी,
ईश्वर को बाहर ढूंढने निकल जाते हो.
उनको ऐसे पाना क्या ज़रूरी है??
झांको खुदमे, खुदको कर नज़र अंदाज़,
जीवन की ठोकरें तुम खाते हो।
हम सब में बसे है ईश्वर,
ये बात तुम कैसे भूल जाते हो??

Prerna Mehrotra Gupta
20/6/2017

कही ना कही

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क्यों बिन वजह पहले,
अरमान जगाते हो?
उदास होकर- फिर,
खुद का ही दिल, तुम दुखाते हो।
हमारे ही किये कर्मो का परिणाम,
कही ना कही हमे ही,पता होता है पहले।
इस बात को समझ- और,
पहले ही खुदसे ये तू कहले।
मिलेगी सफलता तो अच्छा हैं,
ना मिले तो समझ
अभी भी तू एक छोटा बच्चा हैं।
अब उगली पकड़,
तुझे राह कोई दिखायेगा।
जो रह गया तू पीछे,
आने वाले कल में,
उससे और भी बेहतर तू बन जायेगा। .

Prerna Mehrotra
12/4/2017