लोटस सूत्रा

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Want to know more about human behaviour kindly refer Lotus sutra, Awesome book on Earth.

कैसे मानु कि कोई अच्छा है??
कैसे जानू कि उसका दिल भी, मेरे प्रति सच्चा है??
एक पल में अच्छा तो वही दूसरे पल में हमसे बचता है?
इन्ही व्यवहारों को देख, कवि  हर पल कुछ रचता है।
इस व्यवहार का कारण केवल महापुरुष ही जान पाये।
बुरा हो या अच्छा हर एक व्यक्ति उनके मन को भाये।
हमारा व्यवहार पल भर में क्यों बदलता हैं??
इस बात की गहराई का पता हमें (लोटस सूत्रा ) पढ़ कर पता चलता हैं।

Prerna Mehrotra Gupta
23/6/2017

 

ख्यालों की दुनियाँ

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As you think so you become so be positive always.

ख्याल क्या हकीकत बन कर,
हमारे सामने आते है?
क्यों ख्यालों की दुनियाँ में,
हम अक्सर चोट खाते है??
ख्यालों की दुनियाँ में,
ये कैसी लड़ाई हमारे अंदर ही कही चलती है।
कुछ पाने की आरज़ू की लॉ,
हमारे अंदर ही कही जलती है।
ये हकीकत है, या बस किताबों में लिखी बातें है।
इस सच की खोज में,
काटी हमने न जाने कितनी रातें हैं।
अभी तक के ख्याल तो मेरे सामने,
वही रूप लेके आये है।
फिर क्यों हम खुद को अभी तक समझ नहीं पाये है।
मेरे हर ख्याल को बस वही रूप लेने की देरी हैं।
जीवन के आने वाले हर पड़ाव में,
लिखी, “जीत “सिर्फ मेरी हैं।
ये ख्याल बहुतो को राह दिखायेंगे,
आने वाले इतिहास के पन्नो में,
शायद हम भी जग मगायेंगे।

 

Prerna Mehrotra Gupta
22/6/2017

साधू का जीवन

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Spirituality is a continous process which is based on faith, practise & study. Reading a good book doesnt makes you a better person until or unless you apply the same in your life. This poem of mine will depict the struggle of a genuine practitioner of faith. Anyone can  live the life of a monk because it is heart that is important, clothes doesnot play any role in spirituality. Try to be a good person throughout your life.Donot focus outside just focus inside where good & evil both reside.

ज्ञान के समुंदर में डुबकी लगाके,
जो पानी इस तन पर रह जाता है.
उस गीले पन की आड़ में,
मानव इस दुनियाँ से बहुत कुछ कह जाता है।
सूखे तन पर, ज्ञान का पानी जब मिट जाता है।
एहसास करा कर, उस ज्ञानी को,
साधू से उसे साधारण मनुष्य बनाता है।

ज्ञानी जन को हर रोज़,
ज्ञान के समुंदर में डूबना पड़ता है।
अपने अच्छे कर्म द्वारा ही,
वो इस दुनियाँ से लड़ता है।
अच्छाई का आजीवन साथ
देकर ही वो जीवन में आगे बढ़ता है।

रहता ज्ञान का पानी जब तक उसके तन पर,
पड़ता नहीं गलत का प्रभाव फिर उसके मन पर।
अपनी स्थिति हर रोज़ वो योग से सुधारता है।
अपनी ज्ञान रूपी माला से,
न जाने कितनों का जीवन वो सँवारता है।

 

Prerna Mehrotra Gupta
20/6/2017

खबर नहीं खुदकी

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Self control is the best medicine to cure every problem in our life.

खबर नहीं खुदकी,
पर दूसरों की खबर तुम रखते हो।
इधर की उधर करना क्या ज़रूरी है?
दूसरे की सुन,
उसको सही दिशा भी तो तुम दिखा सकते हो??

खबर नहीं खुदकी,
दूसरों की बातों को सुन,चिढ़ के बैठ जाते हो.
उसके प्रति बैर रखना क्या ज़रूरी है???
उस चिड़चिड़ाहट में तुम अपना ही कीमती वक़्त गवाते हो.

खबर नहीं खुदकी,
दूसरों से उम्मीद लगाते हो.
सबसे अपना काम निकलवाना क्या ज़रूरी हैं??
तुम अपनी क्षमता को क्यों नहीं जगाते हो.

खबर नहीं खुदकी,
ईश्वर को बाहर ढूंढने निकल जाते हो.
उनको ऐसे पाना क्या ज़रूरी है??
झांको खुद मे, खुदको कर नज़र अंदाज़,
जीवन की ठोकरें तुम खाते हो।
हम सब में बसे है ईश्वर,
ये बात तुम कैसे भूल जाते हो??

 

Prerna Mehrotra Gupta
20/6/2017

किसी को जब फर्क न पड़े

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If people are not understanding your situation then try to make them realize their mistake through your love & compassion but also try to maintain your self respect.

किसी को जब फर्क न पड़े,तुम्हारे रूठने से।
रिश्ता बिखर कर नहीं जुड़ता,एक बार उसके टूटने से।
तो क्यों न वक़्त -वक़्त पर, अपनी-अपनी बात रखी जाये।
क्यों न दोनों मिल कर, अपना रिश्ता सजाये।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे न होने से,
चैन मिलेगा क्या तुम्हें, अकेले में कही रोने से,
अगर मिले, तो ज़रूर कही चुप के से रो लेना।
अपनों से नाता तोड़, बस अपनों से रुख मोड़ न लेना।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे दुख से,
एहसास कराओ उसको अपनी पीड़ा,अपने सुख से,
तुम्हारा सुख ही उसको उसकी गलती का एहसास करायेगा।
तुम्हें मनाने एक दिन वो भी आयेगा।

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/6/2017

अच्छे लोग भी हैं इस दुनियाँ में…

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Life is a mixture of different people please try to focus on good people and try to be like them.

ऐसा नहीं कि हर मर्द ही,
औरतों को पीटते है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसे भी है,
जो औरतों से बहुत कुछ सीखते है।
बिन बात पर उनपर नहीं चीख़ते है।

ऐसा नहीं कि हर औरत ,
मर्दो के पैसों के पीछे भागती हैं।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसी भी है,
अपनों की परेशानी को देख,
वो रातों को भी जागती है।
सही बात को समझाने में,
वो अपनों को भी डांटती हैं।

ऐसा नहीं कि हर सास,
ही बुरी होती है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसी भी है।
जो अपनी बहू के गम में भी रोती है।
अपनी बहू को बेटी की तरह,
सुलाकर ही सोती है।

ऐसा नहीं कि हर माँ-बाप,
बस बेटों से ही उम्मीद करते है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसे भी है ,
जो बेटियों से भी उतनी ही उम्मीद रखते है।
अपने बुढ़ापे का सहारा वह,
अपनी बेटी को भी समझते हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
15/6/2017

गाँव की रंगीन दुनियाँ ???

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A Salute to a farmers & their family……

ऐसी प्रकृति की ताज़गी,
अब शहरों में खोगई।
देख इन हसींन वादियों को,
ये कवियत्री  भी ख़ुशी से रो गई।
जहाँ देखू वहाँ बीते कल की दास्ताँ,
सुनाई पड़ती हैं।
सुन उन यादों की कहानी,
ये कवियत्री आगे बढ़ती हैं।
कही मटका दिखा,
तो दिखीं, कही खेतों में हरियाली ।
सुख कर काटा बन चुका था,
वो खेतों का माली।
आसान नहीं ये जीवन,
बस दूर से ऐसा लगता हैं।
कर इतनी मेहनत,
किसान को क्या मिलता हैं???

 

Prerna Mehrotra Gupta
28/5/2017