भावनाओं को समझो

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Anger towards bad is good.

बेहतरीन दुनियाँ के बेहतरीन रंग,
अब क्यों मुझे भाने लगे है।
किस्से बातें ना मिलाऊ,
सब ही तो मेरे सगे हैं??
कोई दिल दुखा कर,
सही बात बताता हैं।
तो किसीके अनमोल शब्दों पर,
मेरा मस्तक झुक जाता हैं।
अपनी जगह तो सब ही सही हैं।
चाहें डाट ही कर दिखाये सही राह,
मेरा सगा तो बस वही हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
23/5/2017

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Dr B.R Ambedkar

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भारत के संविधान की करी जिसने रचना,
ऐसे वीरो की सोच से हर बुराई को हैं बचना।
जो आयेगा आड़े वो टिक नहीं पायेगा,
बुराई की राह पर खुद चलके, तू दूसरों को क्या सिखाएगा??

बताया सबने,पर उसने दिखाया करके
बड़ चला वो आगे फिर सब जाति को एक करके।

ना मोह का बंधन, ना थी जिसमें लालच की आग,
निडर होकर लिया उसने हर परिस्थिति में भाग.

जो बरसे अंगारे या बरसीं शब्दों की मार,
चुप ना बैठा वो कभी, मान के अपनी हार।

ऐसे साहेब युगों युगों में एक ही आते हैं,
प्रदर्शन कर अपने गुणों का,वो कुछ नया रच के जाते हैं।

मेरी तुम्हारी कुछ नहीं, उसने करा हमारा
कुछ ना लिया तुमसे, फिर भी कर दिया सब कुछ तुम्हारा।

जाती धर्म की लड़ाई में,जो अकेला लड़ा बेचारा,
कटु शब्दों के बाणों ने, उसे घायल कर-कर  मारा।
सहता वो कब तक सबकी?
जो  लगी हवाओं में भेदभाव की झपकी।
ओडी  उसने फिर बौद्ध  धर्म की चादर,
सिखाया दुनियाँ को फिर प्यार से आदर.
भेद भाव कर आपस में कोई बड़ा कुछ नहीं पाता हैं,
नफ़रत की आग का ज्वाला, सच्चे धर्म के बीज को जलाता हैं।

Prerna Mehrotra
16/4/2016

ज़रा सोचो

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जब पाकर सब कुछ खोना ही हैं ,तो हम यहाँ करने क्या आये हैं??
छोड़ के जाना है बहुत कुछ, जबकि लेकर यहाँ हम कुछ नहीं आये हैं।

जब मिलके यहाँ बिछड़ना ही हैं, तो क्यों हमने दूसरों से उम्मीद लगाई हैं ??
खुद पर होकर निर्भर,बहुत से वीरों ने दूसरों को भी राह दिखाई है।

जब सबके दिल में बसे है भगवान, तो क्यों दूसरों को सताये रे ??
जो देखे सबमे उसकी ऊर्जा वो उस तक ही पहुँच जाये रे।

 

Prerna Mehrotra
4/4/2016

मिथ्या

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ज़ुबां से निकली,हर बात, सच नही होती,
तो क्यों किसी के दिए भय में, तू आज के पल खोती।

कुछ पल की रात्रि, फिर नई सुबह है होती,
तो क्यों दो पल की दूरी में, तू किसीके इंतज़ार में रोती।

बंजर ज़मीन पर भी उम्मीद की वर्षायें है होती,
तो क्यों नहीं चढ़ सकती, अपने दम पर, तू शिखर की चोटी ।

 

Prerna Mehrotra
11/1/2016

पाया नही है इतना

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पाया नही है इतना जिसपर मैं इतराउ,
बड़ा कुछ कर ,न भी पाई, तो बस दुनियाँ से, मैं ये कह जाऊं।
जो पाया उस पर इतराना नही.
जो खोया उस पर हक़ तुम्हारा कभी था ही नही।

 

Prerna Mehrotra
9/1/2016

हमारे हाथ में है सब कुछ

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Our Life is in our  hand…..

साँसों की कीमत, मरने वाला ही जानता है.
ऐसे हाल में किसी को देख, फिर हर कोई ये मानता है।
मेरे दुख /सुख थे, मेरे हाथ में,
ना थी तो बस, ज्ञान की ज्योति मेरे साथ में,
होता तो ये जीवन मैं ऐसे ना बिताता,
खुद के सुख के लिए, मैं दूसरों को ना सताता।

 

Prerna Mehrotra
25/12/2015

ये कैसा जोश है???

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मुड़ के पीछे देखना मुझे आता नही,
ये कैसा जोश है कुछ पाने का,
जो मुझसे दूर कभी जाता नहीं।
आज़मा के देखा जो खुदको मैंने,
ये मन ही लगा फिर मुझसे कहने।
अच्छाई की राह में,भलेही कठनाई है.
बिन जलाये खुदको,
किस महान व्यक्ति ने अपनी मंज़िल पाई है????

 

Prerna Mehrotra
24/12/2015