अपनों की डाट में भी प्यार है.

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Great Human revolution can only happen in a difficult situation.

Prerna Mehrotra Gupta
23/8/2018

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जीवन में सबके अपने अलग अनुभव होते है।

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Innocent and honest people often become the victim of arrogant people but always remember No matter how one tries to defame you “The Truth Always Wins”.

Prerna Mehrotra Gupta
17/8/2018

अंदर से संवारो ख़ुदको

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Your outer appearance will never define your beauty because it is the heart that is important.The one whose intentions are beautiful is actually beautiful & they are the one who peacefully enjoys their life with dignity and making their environment feel proud.In short, the key to success is to become beautiful from within.” A beautiful heart can earn the trust of millions.

गहरी बन, ज़िन्दगी की गहराई में उतरती हूँ।
अपने को कर बस ठीक,
अब हर रोज़ मैं संवरती हूँ।
इस गहराई का सच,
सच्चे लोग ही समझ पायेंगे।
संवार के यू खुदको आज,
आने वाले कल में वही ज़िन्दगी का लुफ्त उठायेंगे।

Prerna Mehrotra Gupta
28/5/2017

तुम भी कर सकते हो

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भावनाओं की बारिश,
दूसरे पर गिर कर भी,
हमें भिगों देती है।
शांति से सिखाकर पहले ,
आने वाले कल में,परीक्षा वो हमारी लेती हैं।
आज किसी पे बीती,
कल तुम पर भी बीत सकती हैं।
अपनी खामियों को भूल,
दूसरों की खामियां ही क्यों सबको बुरी लगती हैं??
इस दुनियाँ में हर कोई,अपनी मेहनत का, ही तो खाता हैं।
हर एक चीज़ जोड़ने में, हर एक का पूरा जीवन लग जाता है।
किसने रोका तुम्हें मेहनत करने से…
तुम्हे ही फुरसत नहीं, दूसरों के नोट गिनने से।
किसी और के नोट गिनने से,
तुम्हारा बटुआ तो भर नही जायेगा।
रहेगा अपने काम में जो मगन,
सुख की रोटी, तो बस वही जीवन में खायेगा।

Prerna Mehrotra Gupta
20/5/2017

सहारा बनु अब उनका

SHYAM MAHROTRA JI [ RING CEREMONY ] 10.3

prerna

सहारा बनु मैं उनका,
जिनका सहारा मैंने कभी पाया था.
अपने बालपन के दरमियाँ,
कितना मैंने,उन्हें सताया था.
उछल कूद कर,
अपनी धुन में, भाग कही मैं जाती थी.
पकड़ी जा हमेशा,
फिर डाट भी मैं ही खाती थी.
उस डाट की समझ,
तब मुझे कहाँ आती थी.
भूल इस दुनियां को,
हर रोज़ मैं वही गलतियां दोहराती थी.
मुझे डाट,फिर उनका भी मन भर आता था,
मुझे समझाकर बहुत,
उनका हौसला भी थक जाता था.
फिर ज़िन्दगी की मुश्किलों ने,
मुझे, वो हर एक बात समझाई.
जो उनके संग रहकर भी मैं,समझ ना पाई.
एक नहीं, दो मात-पिता का,
मेरे जीवन में सुख आया है.
मुझ ना-समझ को समझाकर,
उन्होंने आजीवन बस पुण्य ही कमाया है.
अब बनके उनकी लाठी,
मैं उन संग चलती जाउंगी.
इस बढ़ती उम्र की चढ़ाई में,
मैं उनकी ढाल बन जाउंगी.
जीवन की गहराइयो का सबक,
मैं उनसे सीखती जाउंगी.
ठोकरों की इस धूल में भी,
मैं उन्हें हस के दिखलाऊँगी.
अफ़सोस कर अंत में,
मैं कुछ और भी कहना चाहती हूँ.
दुखाया है कई बार उनका दिल,
उन यादो को याद कर,
मैं अक्सर अश्क बहाती हूँ.
कहती नहीं बस इस मुख से,
मैं दिल से सबको बे इन्तहा चाहती हूँ.

Prerna Mehrotra Gupta
8/5/2017