अपनी ही गलतियों से सीखो

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Mistakes will help you in becoming the perfectionist.

गलतियों में छुपी पूर्णता को देखो,
खुदसे हार,यू खाली बैठ, धूप ना सेको।
आज की गलतियां ही, कल तुझे पूर्ण कर देगी,
तेरे ही उदाहरण से, फिर ये दुनियाँ सबक लेगी।
विश्वास कर अपने विश्वास पर,
खुदपर विश्वास कभी ना खोना।
नज़र अंदाज़ कर मेरी इन बातों को,
अकेले में फिर, तू कही, ना रोना।

 

Prerna Mehrotra Gupta
27/5/2017

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बीता कल, आज और आने वाला कल

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The Past has gone, future is always uncertain- try to give best in present.
अगले पल का पता नही,
और कलकी चिंता करते हो।
अपने आज को बदलते नहीं,
बीते कल की निंदा करते हो.
बस आज को देखो ,
तो सब कुछ बदल जायेगा।
जो कल तक था फ़कीर,
वो कल राजा भी बन जायेगा।

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

ना केवल नारी अच्छी, ना ही केवल नर अच्छा।

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Neither boys nor girls are good it is a person who struggle most in life will enjoy most benefit in life.

ना केवल नारी अच्छी,
ना ही केवल नर अच्छा।
रखे जो खुद पर नियंत्रण,
केवल वही मानव है सच्चा।
जो अपने को ठीक करने में,
दुनियाँ को भूल जाता हैं।
अपनी ही नहीं,
वो दूसरों की भी,
जीत का कारण बन जाता हैं।
एक दिन में,ऐसा बदलाव,
मानव के जीवन में आता नहीं।
रोज़ सवारे जो खुदको,
वो जीवन की ठोकरें, इतनी खाता नहीं।
आज मैं जो भी हूँ,
कल उससे बेहतर होजाऊँगी।
अपनी इसी सोच के कारण,
एक दिन मैं भी बहुत कुछ हासिल कर जाऊँगी।
उसकी नीव रखनी होगी आज से,
फल मिलता हमेशा, मेहनत के काम, काज से।
असफल हुये, तो कभी बैठ ना जाना।
भले मिले चाहे कितने भी गम,
हताश होकर भी, बस अपनी मेहनत की खाना।

 
Prerna Mehrotra Gupta
28/4/2017

नौकरी

नौकरी बनने लगे जब बोझ,
भूल के दुनियां दारी तू, कोई दूसरी अच्छी सी ख़ोज।

नौकरी में मिले,जब बोस के ताने,
मना ले खुदको, सुन के पुराने गाने।

आँखों में पानी का समुंदर ना बनाना,
मना के खुद को पहले तू,दूसरों को भी हसाना।

बेज़्जती कर दूसरों की,जो खुदको बड़ा बताता हैं,
दूसरों की ही नहीं, एक दिन- वो खुद की नज़रो में ही गिर जाता हैं।

Prerna Mehrotra
6/3/2017

जतन

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Image Source-http://www.kleonmm.com/wp-content/uploads/2015/01/giveup.jpg

लाखों कर जतन,
जब इंसान थक जाता है.
इस बात का पता उसे,
फिर आसानी से चल जाता है.
अब इस परिस्थिति में जो,
हार के मैं बैठ जाऊँगा।
आने वाली जीत का लुत्फ,
फिर कैसे मैं उठाऊँगा?
इस शण जो बैठा हार के,
कैसे देखूंगा फिर दिन, मैं आने वाली बहार के??
ये सोच अब रख लू, मैं अपने दुखो को भी संवार  के…….

 

Prerna Mehrotra
26/2/2016

कल किसने देखा हैं

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ज़िन्दगी कब करवट ले ये किसे पता ?
देखो पेड़ भी फैलाता है हर दिशाओं में अपनी लता।
कब हवाये आके उसकी कुछ लताये तोड़ दे ये किसने जाना
फिर बची लताओं के साथ ही उसे आगे बढ़ते है जाना।
अपनी कुछ लताओं को खोकर जब वो टूट जाता है
बची लताओं के सहारे ही फिर वो आगे बढ़ पाता हैं।
तो क्यों ना सीखे ज़िन्दगी का ये सुहाना पाठ हम वृक्ष से
फैलाये हम भी अपनी लताये फिर कल से
एक लता अगर टूट भी गई पर हम तो ना टूट पायेंगे
बची लताओं के सहारे ही हम बहुत कुछ कर जायेंगे।

Prerna Mehrotra
1/11/2014

 

जीत

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हारनेका दूसरा नाम हैं जीतना
हार कर हमे अभी बहुत
कुछ और हैं सीखना।
येतो अभी शुरुवात की जंग हैं।
जीने का सही यही तो ढंग हैं।

Prerna Mehrotra
7/10/2014