साधू का जीवन

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Spirituality is a continous process which is based on faith, practise & study. Reading a good book doesnt makes you a better person until or unless you apply the same in your life. This poem of mine will depict the struggle of a genuine practitioner of faith. Anyone can  live the life of a monk because it is heart that is important, clothes doesnot play any role in spirituality. Try to be a good person throughout your life.Donot focus outside just focus inside where good & evil both reside.

ज्ञान के समुंदर में डुबकी लगाके,
जो पानी इस तन पर रह जाता है.
उस गीले पन की आड़ में,
मानव इस दुनियाँ से बहुत कुछ कह जाता है।
सूखे तन पर, ज्ञान का पानी जब मिट जाता है।
एहसास करा कर, उस ज्ञानी को,
साधू से उसे साधारण मनुष्य बनाता है।

ज्ञानी जन को हर रोज़,
ज्ञान के समुंदर में डूबना पड़ता है।
अपने अच्छे कर्म द्वारा ही,
वो इस दुनियाँ से लड़ता है।
अच्छाई का आजीवन साथ
देकर ही वो जीवन में आगे बढ़ता है।

रहता ज्ञान का पानी जब तक उसके तन पर,
पड़ता नहीं गलत का प्रभाव फिर उसके मन पर।
अपनी स्थिति हर रोज़ वो योग से सुधारता है।
अपनी ज्ञान रूपी माला से,
न जाने कितनों का जीवन वो सँवारता है।

 

Prerna Mehrotra Gupta
20/6/2017

किसी को जब फर्क न पड़े

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If people are not understanding your situation then try to make them realize their mistake through your love & compassion but also try to maintain your self respect.

किसी को जब फर्क न पड़े,तुम्हारे रूठने से।
रिश्ता बिखर कर नहीं जुड़ता,एक बार उसके टूटने से।
तो क्यों न वक़्त -वक़्त पर, अपनी-अपनी बात रखी जाये।
क्यों न दोनों मिल कर, अपना रिश्ता सजाये।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे न होने से,
चैन मिलेगा क्या तुम्हें, अकेले में कही रोने से,
अगर मिले, तो ज़रूर कही चुप के से रो लेना।
अपनों से नाता तोड़, बस अपनों से रुख मोड़ न लेना।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे दुख से,
एहसास कराओ उसको अपनी पीड़ा,अपने सुख से,
तुम्हारा सुख ही उसको उसकी गलती का एहसास करायेगा।
तुम्हें मनाने एक दिन वो भी आयेगा।

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/6/2017

अच्छे लोग भी हैं इस दुनियाँ में…

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Life is a mixture of different people please try to focus on good people and try to be like them.

ऐसा नहीं कि हर मर्द ही,
औरतों को पीटते है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसे भी है,
जो औरतों से बहुत कुछ सीखते है।
बिन बात पर उनपर नहीं चीख़ते है।

ऐसा नहीं कि हर औरत ,
मर्दो के पैसों के पीछे भागती हैं।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसी भी है,
अपनों की परेशानी को देख,
वो रातों को भी जागती है।
सही बात को समझाने में,
वो अपनों को भी डांटती हैं।

ऐसा नहीं कि हर सास,
ही बुरी होती है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसी भी है।
जो अपनी बहू के गम में भी रोती है।
अपनी बहू को बेटी की तरह,
सुलाकर ही सोती है।

ऐसा नहीं कि हर माँ-बाप,
बस बेटों से ही उम्मीद करते है।
इस दुनियाँ में कुछ ऐसे भी है ,
जो बेटियों से भी उतनी ही उम्मीद रखते है।
अपने बुढ़ापे का सहारा वह,
अपनी बेटी को भी समझते हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
15/6/2017

मेरी कुछ अन कही ख्वाहिशें

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My untold dreams…..

काश एक शांति की दुनियाँ मैं बना पाऊँ,
काश उसे अपनी अच्छी सोच से मैं सजा पाऊँ,
आसान  हैं लड़ झगड़ के रहना,
बड़ा मुश्किल हैं, शांति से हर बात को अपनी कहना।

काश मेरी ख्वाहिशों के इशारे,
मेरे अपनों को समझ आने लगे।
कैसे दुनियाँ को भूल हम,
खुदा की बनाई राह पर जाने लगे।

काश ज़िन्दगी का सफर,
यूं  ही अपनों के संग हस्ते हुये कट जाये।
मेरी कमाई ज्ञान की दौलत,
मेरे अपनों में थोड़ी थोड़ी बंट  जाये।

काश मेरे हर दिन के परिवर्तन को लोग जान पायें,
मुझे समझ, मेरे पीछे कोई, मुझसे ये पूछने को आये,
तुम्हारे व्यवहार में ऐसी निर्मलता कैसे आई।
तुम्हारे हर रूप की छवि हम सब के मन को है भाई।

काश इस दुनियाँ में,
सब प्यार की भाषा समझते,
अपने को संभाल,
किसी और की बातों में ना उलझते।

काश प्यार की अनोखी कला,
मैं दुनियाँ को शांति से बताती।
अपने को कर जग कल्याण के लिए समर्पित,
मैं दूसरों की ख़ुशी में मुस्कुराती।

काश शांति का सफर,
सबको अच्छा लगता करना।
मद मस्त रहते सब अपनी धुन में,
फिर काहे, किसी से डरना।

Prerna Mehrotra Gupta
7/6/2017

 

भावनायें कवयित्री की…..

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Poetess can understand the pain of every aspects of life and she has a power to depict the same in her poetries.

हवाओं में छुपे ज्ञान को कवयित्री,
अपनी कविताओं में, बंद कर देती हैं।
करके रात दिन इन घटाओं से बातें,
वो किसीसे कुछ नही लेती हैं।
अपने भावों को बताने में,
ना जाने कितनी परीक्षा, वो जीवन की देती हैं।
हर एक पल, उसे ज़िन्दगी कुछ सिखाती हैं।
अपनी कविताओं के ज़रिये,
वो दूसरों को भी जगाती हैं।
कोई सीखें उससे,
तो कोई उसकी मज़ाक उड़ाता हैं।
जीवन के हर रंग रूप को देख,
उसे फिर भी मज़ा आता हैं।

Prerna Mehrotra Gupta
25/5/2017

बेज़ुबानों से करती हूँ मैं बातें…..

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मस्ती भरे वो पल,
जिसमे बीता था वो कल,
बंद कर अखियाँ,
जिनकी छवि आज भी मुझे दिखती है।
भावुक मन से, उन लम्हों को याद कर,
ये कवयित्री हर रोज़ जीवन पर लिखती हैं।
याद करू जब, उन यादों को,
तभी वो मुझे सताती हैं।
बीते कल की कहानी,
वो अक्सर मुझे बताती हैं।
अपनी भावनाओं में बहकर,
फिर कही जाके लिख पाती हूँ।
दुनियाँ में बसे, हर एक जीव की कहानी,
मैं यू ही नहीं लिख पाती हूँ।
इस दिमाग को कर स्थित,
बेज़ुबानों से बातें, मैं करती हूँ।
कहता नही जो अपने हक़ में,
उसकी सादगी पर मैं मरती हूँ।
बेज़ुबानों के पक्ष में खड़ी मैं,
इस दुनियाँ से, अपनी कविताओं के ज़रिये लड़ती हूँ।

 

Prerna Mehrotra Gupta
17/5/2017

दो अलग विचारो की कहानी…

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दो अलग विचारो की कहानी,
कैसे मिलकर एक होगई??
वो पुराने,अधूरे पन की दास्ताँ,
अब शायद हमसे, दूर होगई।
मिले है हम इस जीवन में,
तो कुछ बड़ा ,तो ज़रूर, करके दिखायेंगे।
उस जीत के जशन में,
अपने ही लोग हर तरफ जगमगायेंगे।
मिलेगी अपार शांति मेरे हर एक अपने को,
जिन्होंने दिखाई राह, मेरे हर एक सपने को….

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/5/2017