किसी को जब फर्क न पड़े

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If people are not understanding your situation then try to make them realize their mistake through your love & compassion but also try to maintain your self respect.

किसी को जब फर्क न पड़े,तुम्हारे रूठने से।
रिश्ता बिखर कर नहीं जुड़ता,एक बार उसके टूटने से।
तो क्यों न वक़्त -वक़्त पर, अपनी-अपनी बात रखी जाये।
क्यों न दोनों मिल कर, अपना रिश्ता सजाये।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे न होने से,
चैन मिलेगा क्या तुम्हें, अकेले में कही रोने से,
अगर मिले, तो ज़रूर कही चुप के से रो लेना।
अपनों से नाता तोड़, बस अपनों से रुख मोड़ न लेना।

किसी को जब फर्क न पड़े, तुम्हारे दुख से,
एहसास कराओ उसको अपनी पीड़ा,अपने सुख से,
तुम्हारा सुख ही उसको उसकी गलती का एहसास करायेगा।
तुम्हें मनाने एक दिन वो भी आयेगा।

 

Prerna Mehrotra Gupta
16/6/2017

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पीढ़ी दर पीढ़ी

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I dedicate this post to Rohit Agarwal- A caring father & Son.

ये संस्कार ही तो,
पीढ़ी दर पीढ़ी जाते हैं।
रिस्तो से बंधे,
ये ऐसे नाते हैं।
एक रूठ जाये,
तो दूसरा मनाता हैं।
रिश्तों की माला से,
यूही तो घर सज जाता हैं।

 

Prerna Mehrotra
27/3/2017

भाई- बहन

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Selfless love of brother & sister. I dedicate this post to Harshita Garg who wants to express her feeling towards her cousins through me.

भाई बहन का नाता,
होता हैं अनमोल।
लड़ते झगड़ते,
एक दूसरे की, खोल देते ये पोल।
खुट्टा कर, एक दूसरे से,
रहते ये फिर भी साथ में.
बनती खुशियों की लकीर,
इनसे ही तो हाथ में।

 

Prerna Mehrotra
26/3/2017