बीता कल, आज और आने वाला कल

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Just go with the flow….

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

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ईमानदारी से खेलो

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There is no shortcut to success.

इस लम्हें को इस लम्हें में,
तू खुल के जीले।
अगर करी हैं तूने ,ईमानदारी से मेहनत,
तो आने वाले जीत का जाम,
तू अभी से पीले।

तेरे कर्म का सच बस तू ही जानता हैं।
अच्छे रास्ते पर चलने वालो को,
ये जग भी मानता हैं।
अपने हित के लिए, किसी का बुरा ना करना।
महंगा पड़ता ,अपना वार ही वरना।

मेहनत से पनपे भोजन का,
स्वाद ही अलग होता हैं।
जो करता है इसमें मिलावट,
आजीवन वो सुख के लिए रोता हैं।

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

तुम भी कर सकते हो

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भावनाओं की बारिश,
दूसरे पर गिर कर भी,
हमें भिगों देती है।
शांति से सिखाकर पहले ,
आने वाले कल में,परीक्षा वो हमारी लेती हैं।
आज किसी पे बीती,
कल तुम पर भी बीत सकती हैं।
अपनी खामियों को भूल,
दूसरों की खामियां ही क्यों सबको बुरी लगती हैं??
इस दुनियाँ में हर कोई,अपनी मेहनत का, ही तो खाता हैं।
हर एक चीज़ जोड़ने में, हर एक का पूरा जीवन लग जाता है।
किसने रोका तुम्हें मेहनत करने से…
तुम्हे ही फुरसत नहीं, दूसरों के नोट गिनने से।
किसी और के नोट गिनने से,
तुम्हारा बटुआ तो भर नही जायेगा।
रहेगा अपने काम में जो मगन,
सुख की रोटी, तो बस वही जीवन में खायेगा।

Prerna Mehrotra Gupta
20/5/2017

दास्ताँ शहीद की……

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Image Source-http://news24online.com/jai-hind-help-martyrs-kins-via-websitegovt-salutes-akshays-idea-76/

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कैसे ज़िन्दगी के सीनेपे रखकर,
तुम अपना सर,अपनी जान गवाते हो??
खुदकी दुनियाँ को भूल,
क्यों आजीवन, दूसरों की दुनियाँ सजाते हो??
तुम्हारी पत्नी भी तो,
तुम्हारे इंतज़ार में रोती हैं।
अचानक तुम्हारे शव को देख,
वो अपनी सुध-बुध खो देती हैं।
तुम्हारा आशियाना तुम्हारे इंतज़ार में,
कई ख्वाब सजाता हैं।
तुम्हें सदा के लिए खोकर,
वो भी रुआँसा हो जाता हैं।
कैसे अपनी यादें छोड़,
तुम कही, इस दुनियाँ में खो जाते हो??
अपनो को देख यू रोता,
क्या तुम भी रो जाते हो??
हैं अगर ये सच,
तो आजाओ फिर एक बार सामने।
दुनियाँ की इस भीड़ में,
एक बार फिरसे हमारा हाथ थाम ने।
तुम्हारी यादो की छवि हम से,
अक्सर ये कह जाति है.
भूली नही मैं तुझे,
फिर क्यों इन यादों को सोच,
तू अक्सर अश्क बहाती हैं??
मिलकर बिछड़ना यही
तो ज़िन्दगी का नाम हैं।
मर मिटते है देश के खातिर,
ये सब तो हमारे लिए आम है।
मरके भी देखो यारो,
हमारे हाथो में जीत का जाम हैं।
यू दुखी होकर,
तुम खुदको कभी सताना नहीं।
बस यादों में खोकर,
हर पल यू प्यार जताना नहीं।
मिलेंगे फिर से हम कही इस जहान में।
ना होगी तुम्हें ज़रा भी देरी,मेरी पहचान में।
दुनिया की भीड़ में भी,
मैं तुम तक पहुँच जाऊँगा।
रहूँगा सदा तुम्हारे साथ,
अब तुमको ऐसे कभी ना रुलाऊँगा।
Prerna Mehrotra Gupta
29/4/2017