ईमानदारी से खेलो

 

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There is no short cut of success.

इस लम्हें को इस लम्हें में,
तू खुल के जीले।
अगर करी हैं तूने ,ईमानदारी से मेहनत,
तो आने वाली जीत का जाम,
तू अभी से पीले।

तेरे कर्म का सच बस तू ही जनता हैं।
अच्छे रास्ते पर चलने वालो को,
ये जग भी मानता हैं।
अपने हित के लिए, किसी का बुरा ना करना।
महंगा पड़ता ,अपना वार ही वरना।

मेहनत से पनपे भोजन का,
स्वाद ही अलग होता हैं।
जो करता है इसमें मिलावट,
आजीवन वो सुख के लिए रोता हैं।

 

Prerna Mehrotra Gupta
26/5/2017

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जो ना झुलसे

अक्सर देखा है,
मैंने बहुतो को रोते हुये,
तन, मन, धन, लुटा कर भी खोते हुये।
ख़ुशी वो नहीं जो बहार से दिखती हैं,
अग्नि की तपन सह कर ही एक रोटी सिकती है.
उस तेज़ की  तप से ही तो,  बनी है वो पूरी,
जो ना झुलसती, तो रह जाती अधूरी।
ख़ुशी का प्रकाश, तप कर ही जगमगाता हैं.
जो ना झुलसे इसमें वो पीछे रह जाता हैं।

 

Prerna Mehrotra
21/4/2017

ना जाने कौनसी घड़ी

 

 

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ना जाने कौनसी घड़ी,
जीत का तोहफा लेकर आयेगी।
रुला के, उस पल मुझे,
वो मेरे, कल की याद दिलायेगी।
बरसेंगे फूल इन वादियों की छाओ में,
गर्व कर मुझ पर, ख़ुशी से झूमेंगे, सब मेरे गाँव में।

 
Prerna Mehrotra
17/4/2017

अपनी ज़िन्दगी से….

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अपनी ज़िन्दगी से,
हमने भी कुछ उम्मीद लगाई हैं।
किसी के मौहताज नहीं,
हमने खुद से,अपनी दुनिया
इन कविताओं से सजाई हैं।
पाऊँगी अपना लक्ष्य,
इन कविताओं की बौछार में….
मिले प्यार के जैसे रंग,
तीज और त्यौहार में…..

Prerna Mehrotra
19/3/2017

 

 

दुख भी ज़रूरी है

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Whatever is happening is happening for a good cause.

अफ़सोस कर जीवन में ,
मैंने कुछ ना पाया,
जो बोया उम्मीद का बीज,
फिर सब इस मन को भाया।

पीड़ा पंहुचा के खुदको,
मैंने अपना दिल ही दुखाया।
बदला जो देखने का नज़रिया,
बिना मलहम ही फिर, अपने घावों को सुखाया।

बदलते रिश्तों की भीड़ में,
मैंने खुदको अकेला पाया,
समझ में आई जब,इस दुनियाँ की माया,
फिर ये खेल, मुझे भी समझ में आया.
दुख ना होते तो सुख का अनुभव
ये मन कर ना पाता।
जो होते सिर्फ सुख ही,
तो ये मन इतनी रचनाये कर ना पाता।
Prerna Mehrotra
25/9/2015

सच तो यही है

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Image Source-http://www.mater.org.au/getfile/fe64dba1-15d3-480d-ac12-514ac5880fa1/Dignity_MONO.aspx

पैसो से नही,
इज़्ज़त तो कर्मो से कमाई जाती है।
ऐसी ही इज़्ज़त की चमक
फिर हर किसीके मन को भाती है।

अच्छी यादो का सिलसिला,
दिल में उतर जाता है.
जो हो इसमें ज़रा भी कड़वाहट
तो दिल से उत्तर जाता है.

अपनी मेहनत के दम पे,
जो दूसरा का भला कर पाता है.
बिना किसी उलझन के,
फिर वो इस दुनिया में नाम कमाता है।

Prerna Mehrotra
23/8/2015

It’s not How, It’s Why

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Today came across the book; it’s not how, its why – by Ranjit Samal. It’s a self help book, primarily a motivational and youth focused. The book contains 9 reasons for our youths, which answer the question “Why to be successful” – it connects the principle of success.

“Success is the word, which has become a prime parameter for our existence. People work hard, prove their potentials, enjoy with their achievements and come out with lessons for success.  These lessons turn out to be theory for all who are willing to be successful. How to be successful has become a great question and is being magnified day by day.

Is it money, large house, luxury car, utmost life style, popularity, high extent of political reach are the only reasons to be successful , which attracts people? Is that one has to be successful for one’s self?

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What are other reasons for you to be successful in context of values and principle of success?

The book answers this question in very simple language. The author elaborates his life experiences and explains the concepts in lively lines, which an unknown reader can relate to his/her life.

Different theories, concepts, directions and solution to be successful had made today’s youth so confusing that they keep trying to analyze “how to be successful” and forget the root parameter i.e. “why to be successful”

Understanding ‘Why to be successful”, makes our life simple and helps in generating a simple solution for “how to be successful”. Deeper your understanding about “why” more simple solutions will be for your “How”.

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Now having a view on the book, I conclude that the top 5 reasons why one should read this book:

  1. It will give a differential idea about why one has to be successful – connecting principle of success.
  2. What a youth should think about and work upon
  3. What a youth’s though process should be?
  4. Understand principle of success at a very personal level and even connect it to your own life
  5. It’s a book from the ‘Youngest author of nation” in self-help category.

In the end I am sharing my views on how to get success.

जीतना तो दुनिया में हर कोई चाहता है,
हर कोई राजा बनने के सपनें सजाता है।
पर जो मेहनत की होड़ में,
अपनी इच्छाओं को दबाता है,
वही इंसान एक दिन कुछ कर दिखलाता है।

पाना तो सब चाहते है,
पर खोना कोई नहीं चाहता।
जो ना होए इच्छा पूरी,
तो हार कर अश्क बहाता।
ऐसा कर तू बस अपना दिल दुखाता,
क्यों नहीं पहले तू
अपने अरमानों पर रोक लगाता??

जो खोएगा वही पायेगा।
दुनियाँ की भीेड़ में धक्के खाके
एक दिन वही दूर निकल जायेगा।
पर जो दूंसरे की मेहनत का खायेगा,
वो मेहनत कर भी कायर कहलायेगा।

Prerna Mehrotra
17/5/2015