ख्यालों की दुनियाँ

As you think so you become so be positive always.

ख्याल क्या हकीकत बन कर,
हमारे सामने आते है?
क्यों ख्यालों की दुनियाँ में,
हम अक्सर चोट खाते है??
ख्यालों की दुनियाँ में,
ये कैसी लड़ाई हमारे अंदर ही कही चलती है।
कुछ पाने की आरज़ू की लॉ,
हमारे अंदर ही कही जलती है।
ये हकीकत है, या बस किताबों में लिखी बातें है।
इस सच की खोज में,
काटी हमने न जाने कितनी रातें हैं।
अभी तक के ख्याल तो मेरे सामने,
वही रूप लेके आये है।
फिर क्यों हम खुद को अभी तक समझ नहीं पाये है।
मेरे हर ख्याल को बस वही रूप लेने की देरी हैं।
जीवन के आने वाले हर पड़ाव में,
लिखी, “जीत “सिर्फ मेरी हैं।
ये ख्याल बहुतो को राह दिखायेंगे,
आने वाले इतिहास के पन्नो में,
शायद हम भी जग मगायेंगे।

Prerna Mehrotra Gupta
22/6/2017

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भरोसा रखो

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Image source-http://thefamily.com/wp-content/uploads/2014/07/faith-hope.jpg

Have faith Everything will be fine someday or the other

भरोसा रखो अच्छा होगा,
मेहनत का रंग सच्चा होगा।
उन रंगो में छुपे होंगे अनेको उपहार,
दिल की गहराइयों से तू बस उन लम्हों को पुकार।

Prerna Mehrotra
31/7/2015

फिर भी ?

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Source: http://blog.gulpfish.com/wp-content/uploads/2011/11/think-positive.jpg

जो हो रहा है,वो अच्छा है।
जो होगा वो भी अच्छे के
लिए ही होगा।
ये तो हमारे सोचने का
नज़रिया है।
ये नज़रिया ही तो,
ईश्वर का खबरिया है।
जो उन्हें बताता है,
तुम क्या सोचते हो
फिर भी गलत सोच की राह में
तुम अपनी मुसीबतों का हल
खोजते हो।

Prerna Mehrotra
11/12/2014

अच्छा सोचो

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“As you think so you become”there is no cost of thinking positive but still people find it most costly and that’s become a reason for their unhappiness try to understand this fact that your life is in your hand do not waste it with cheap thoughts, create some value and become the hero/heroine of your life.

Prerna Mehrotra
1/11/2014

लक्ष्य

 

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Being an economics and finance student I choose to become a poetess because I believe in me

कई मंज़िल को छोड़
हमने चुनी बस एक राह
जो थी हमारे मन की वो एक इकलौती चाह
उस चाह को पाने मे
हमने दिन रात ना देखा
धीरे धीरे बनने लगी हमारे हाथ में
फिर उस लक्ष्य की रेखा।
ये रेखा हमने खुदने बनाई
ये कोई जानता नहीं।
जो दिखे लोग कहे बस वहीं हैं सही।
एक बार तू अपनी किस्मत को आज़मा के तो देख
खाली बैठ बस तू यू बड़ी बड़ी ना फेक।
जो सोचेगा वही पायेगा
इस भागती ज़िंदगी में
अपनी सोच के बल पे हीं तू
वीर या कायर कहलायेगा।

Prerna Mehrotra
29/10/2014

 

सोच

 

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As you think so you become.

सोचा तो कई सवाल इस मन में आएं
आखिर किस मकसद से हम इस दुनिया में आए??
अब आए तो आए
तो क्यों ना अपनी इस दुनिया को हम
अपनी  खयालों की सोच से सजाए।
सजाने बैठे तो आई मुश्किल
टूट के बिखर गया फिर हमारा ये दिल.
अब क्या कहके हम इस सोच को समझाए
ये वक़्त भी हमारे लिए कैसे थम जाए??
इस सोच को हकीकत में बनाने में करनी पड़ेगी मेहनत.
इस बात से मेरी,होजाओ अब तुम भी सहमत
क्योंकि  जो बोओगे वहीं पाओगें
करके अपने कर्म तुम ईष्वर के पास ही जाओगे
इसलिए अभी इसी वक़्त से ही
सोचों तुम अच्छी अच्छी बातें
कट जाएंगी यू ही,
फिर हर मुश्किलों वाली भी रातें।

Prerna Mehrotra
23/10/2014